Monday, February 28, 2011

Heerasingh: Woh Keh Gaye Ki Mera IntezaarMat Karna,Main Kahu...

Heerasingh: Woh Keh Gaye Ki Mera Intezaar
Mat Karna,
Main Kahu...
: "Woh Keh Gaye Ki Mera Intezaar Mat Karna, Main Kahu Bhi To Muj Pe Aitbaar Mat Karna, Wo Kehte hai Ke Mujhe Tumse Mohabaat Nahi, Par Tum Kisi ..."

Sunday, February 27, 2011

Romantic sms

Kyu rakhu me ab apni kalam me
shahi jab koi arman dil me
machalta hi nahi, Na jane kyu sabhi
shak karte he mujh par jab koi
sukha phool meri kitab me milta hi
nahi, Kashish to bahut hai mere
pyar me magar kya karu ye patthar
dil pigalta hi nahi, Agar khuda mile
to usse apna pyar manguga magar
suna hai woh marne se pehle milta
hi nahi.

Romantic sms

Us din khuda ne bhi jasn manaya
hoga, Jis din fursat se apko banaya
hoga, Ankho se uske bhi nikle
honge ansu, Jab tumko yaha
bhejkar khud ko akela paya hoga.

Thursday, February 24, 2011

funny friendship sms

mere jeene ki dua karega kaun
Har karz dosti ka ada karega
kaun, Jab hum hi nahi rahenge to
dosti...
Mere marne ki dua kaun karega
Khuda salamat rakhna mere
dushmano ko, Varna mere marne
ki dua kaun karega, Aur...
Warna hamari maut ki dua kaun
karega Khud ki mohabbat tabah
kaun karega, Sabhi nek banenge
to gunah kaun karega, Ae...
Pyaar na rahe toh wafa kaun
karega Pyaar na rahe toh wafa
kaun karega, Dost na rahe toh
dosti kaun karega,...
Uski yad mein guzarti meri har
sham thi… Uski yad mein guzarti
meri har sham thi, Mere dil se
nikli har dua uske...
ya rabb meri maa ko lazawaal
rakhna Ya RABB Meri MAA ko
Lazawaal rakhna, Main rahon na
rahon Meri MAA ka khayal...
Baba G dua karen meri Kisi
samajhdar aadmi se meri shadi
hojae Larki ek baba G se: Baba G
dua karen meri Kisi samajhdar
aadmi se meri...
Saans teri ruke too maut meri
hoo Dil tera dhadke to dhadkan
mere ho, Chot tujhe lage to dard
mujhe ho,...
Dosti ka pahla paigam aapke
naam Dosti ka pehla paigam
aapke naam, Zindagi ki aakri saas
aapke naam, Rahe salamat...
Teri khushi meri jaan hai Teri
muskurahat meri pehchan hai,
Teri khushi meri jaan hai, Kuch
bhi nahi meri...
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love love store

प्रेमी अपनी प्रेमिका का हाथ
माँगने उसकी माँ के पास पहुँचा
तब वह गुस्से में बोली
‘तुम्हारे पास क्या है
गाड़ी , बंगला या बैंक बेलेंस
प्रेमी फिल्मी स्टाइल में बोला
‘मेरे पास बस प्यार है’
प्रेमिका की माँ भड़क गयी गयी
और चिल्लाकर बोली
‘उसका क्या मेरी बेटी अचार डालेगी
यह कमाकर तुम्हें पालेगी
यह हर महीने नया सूट खरीद कर लाती है
तुम्हें जिस मोबाइल से करती है फोन
उसमे सिम बाप के पैसे से डलवाती है
तुम इसके खर्च उठा सकोगे
क्या है तुम्हारे पास
प्रेमी बोला
‘मेरे पास बस प्यार है’
प्रेमिका अपनी माँ से नाराज होकर
बोली
‘मम्मी तुम मेरी इसके साथ
शादी कराने पर राजी हो जाओ
नहीं तो में अपनी जान दे दूँगी या
इसके साथ भाग जाऊंगी ‘
माँ खुश होकर बोली
‘बेटी इसमें पूछना क्या
कल को भागती है
आज ही भाग जा
बाकी मैं संभाल लूँगी’
वह अपने कमरे से
अपना सामान उठाकर ले आई
और प्रेमी से बोली
‘चलो अब यहाँ से निकलते हैं
कहीं और बसते हैं’
‘ठीक है कुछ पैसे भी रख लेना
तुम्हारे प्यार में पिताजी के दिये
सब पैसे तुम पर खर्च का दिया
अब जो बचा
मेरे पास बस प्यार है’
पहले तो प्रेमिका हतप्रभ रह गयी
और फिर सोचते हुए बोली
‘इससे काम नहीं चलेगा
यह घर छोड़ा तो यहाँ भी फिर
यहाँ भी नो एन्ट्री का बोर्ड
लगेगा
कुछ तो होगा तुम्हारे पास
प्रेमी बोला
‘मेरे पास बस प्यार है’
प्रेमिका को गुस्सा आ गया और बोली
‘तुम अब अकेले चले जाओ
इस तरह नहीं चल
सकती जिन्दगी की गाड़ी
प्यार तो है चार दिन का
फिर तो चाहिये मुझे गहने और साड़ी
फिर भी प्रेमी नहीं मान रहा था
आखिर माँ-बेटी ने धकेल कर
उसे घर से बाहर निकाला
वह बस ऐक ही रट लगाये जा रहा था
‘मेरे पास बस प्यार है’
—————–

Wednesday, February 23, 2011

pyar hai to bol tho..

प्यार है तो बोल दो
मेरा तेरे दिल पर राज करना क्या,
मेरी बात पे तेरा मुस्कुराना आखिर
क्या है ,
घंटों मेरा इंतजार करना,थक कर सोफे
के एक किनारे लुढक जाना,
वापिस आने पर प्यार से झगड़ना और
घंटों बाँहों में बाहें डाले
पुरानी रोमांटिक बातें करना
क्या है ,,,,हाँ बताओ क्या है,,
क्या है जो बिन बारिश मेरे न होने पे
तुम्हारी आँखों से बरसने लगता है ,
क्या है जो मेरे जल्दी घर लौटने
की दुआएं करता है
क्या है जो दिन में हर दो घंटे पे
मेरा रिंग बज उठता है और सामने
तुम्हारी आवाज़ होती है
क्या है ,,हाँ बताओ क्या है,
कुछ तो खास है
कुछ तो तेरे दिल के पास है
वरना कमोशियों में शोर
सबको नही सुनाई पड़ते
तन्हाइयों में जीने का मकसद हर
किसी को नही मिलता
सोचने का वक़्त और उस वक़्त
की खूबसूरती वीरले ही मिलती है
कहीं मै तुम्हारा प्यार तो नही
कहीं मै तुम्हारे दिल का सर्कार
तो नही
मै नही कहूँगा की मै कौन हूँ
फैसला तुम्हे करना है
क्या हम पहले की तरह फिर धड़क सकते
हैं ,,
अगर हाँ तो मेरा दरवाजा हमेशा के लिए
खुला है
और जनता हूँ की तुम्हारा

Friday, February 18, 2011

Hindi Love store

रानी रूपमबाज ती-बहादुर
मालवा की गायिका थीं रूपमती, सुल्तान
बाज बहादुर उनसे प्रेम करते थे। यह
अंतर्धार्मिक विवाह था। युद्ध,
प्रेम, संगीत और कविता का अद्भुत
सम्मिश्रण है यह जादुई प्रेम कहानी।
बाज बहादुर मांडु के अंतिम स्वतंत्र
शासक थे। रूपमती किसान पुत्री और
गायिका थीं। उनकी आवाज के मुरीद बाज
बहादुर उन्हें दरबार में ले गए।
दोनों परिणय सूत्र में बंध गए, लेकिन
यह प्रेम कहानी जल्दी ही खत्म हो गई,
जब मुगल सम्राट अकबर ने मांडु पर
चढाई करने के लिए अधम खान को भेजा।
बाज बहादुर ने अपनी छोटी-सी सेना के
साथ उसका मुकाबला किया किंतु हार गए।
अधम खान रानी रूपमती के सौंदर्य पर
मर -मिटा, इससे पूर्व कि वह मांडु के
साथ रूपमती को भी अपने कब्जे में
लेता, रानी रूपमतसेवन करके मौत
को गले लगा लिया।
लैला-मजनूं
अरबी संस्कृति में दुखांत प्रेम
कहानियों की पूरी श्रृंखला है,
जिनमें कैस-लुबना, मारवा-अल मजनूं अल
फरांसी, अंतरा-अबला, कुथैर-अजा, लैला-
मजनूं की कहानियां प्रमुख हैं। लैला-
मजनूं की प्रेम कहानी नई नहीं है।
अरब के बानी आमिर जनजाति का था यह
कवि यानी मजनूं। लैला भी इसी जाति से
आती थीं। लैला के पिता के विरोध के
कारण इनका विवाह नहीं हो सका और
लैला किसी और की पत्नी हो गई। मजनूं
पागल हो गए, इसी पागलपन में उन्होंने
कई कविताएं रचीं। लैला पति के साथ
ईराक चली गई, जहां कुछ ही समय बाद
बीमार होकर उनकी मृत्यु हो गई। मजनूं
भी कुछ समय बाद मौत की गोद में चले
गए।
अरब और हबीब लोकसाहित्य से लेकर
फारसी साहित्य तक यह प्रेम कथा कई
रूपों में सामने आई। आम लोग इसे
निजामी के पर्सियन संस्करण से
ही जानते हैं। कहा जाता है कि रोमियो-
जूलियट की कहानी लैला-मजनूं
का ही लैटिन संस्करण है।
सलीम-अनारकली
मुगल सम्राट अकबर के चहेते और
बाबा फरीद के आशीर्वाद से जन्मे बेटे
सलीम ने अनारकली से प्रेम किया।
अनारकली एक मूर्तिकार की बेटी थी और
बेहद सुंदर थी। अकबर इस प्रेम के
खिलाफ थे। अनारकली के प्रेम में पागल
शाहजादा सलीम ने अपने पिता के खिलाफ
बगावत तक कर दी। कहा जाता है
कि दरियादिल माने जाने वाले मुगल
सम्राट ने अनारकली को जिंदा दीवार
में चिनवा दिया गया। मुगले-आजम
जैसी फिल्म ने इस प्रेम कथा को अमर कर
दिया।
हीर-रांझा
पंजाब की धरती पर कई प्रेम कथाओं
का जन्म हुआ, जिनमें वारिस शाह रचित
हीर को साहित्यिक जगत के लोग
बखूबी जानते हैं। अमीर परिवार
की खूबसूरत हीर ने प्रेम
किया रांझा से। रांझा अपने चार
भाइयों में सबसे छोटा था, भाइयों से
विवाद के बाद वह घर छोडकर भाग गया और
हीर के गांव तक आ पहुंचा। हीर के घर
में वह पशुओं की रखवाली करने लगा।
दोनों के बीच प्रेम हुआ और कई
वर्षो तक दोनों मिलते रहे, लेकिन हीर
के ईष्र्यालु चाचा कैदो और माता-
पिता के कारण दोनों का विवाह
नहीं हो सका, हीर का विवाह अन्यत्र कर
दिया गया। रांझा जोगी हो गया और अलख
निरंजन कहकर गांव-गांव फिरने लगा।
जोगी रूप में एक बार फिर वह हीर से
मिला। दोनों भाग गए लेकिन पुलिस ने
उन्हें पकड लिया। लेकिन उसी रात पूरे
शहर में आग लग गई। घबराए हुए
महाराजा ने प्रेमियों को आजाद कर
दिया और उन्हें विवाह की इजाजत दे
दी। दोनों हीर के गांव वापस आए, इस
बार माता-पिता उनके विवाह पर
राजी हो गए। विवाह के दिन हीर के
ईष्र्यालु चाचा कैदो ने हीर को विष
खिला दिया, रांझा ने उसे बचाने
की बहुत कोशिश की किंतु हीर न बच सकी।
हीर के दुख में व्यथित
रांझा की भी बाद में मौत हो गई। एक
दारुण प्रेम कहानी खत्म हो गई।
सोहनी-महिवाल
पंजाब की ही धरती पर उगी एक अन्य
प्रेम कथा है सोहनी-महिवाल की। सिंधु
नदी के तट पर रहने वाले कुम्हार
तुला की बेटी थी सोहनी। वह कुम्हार
द्वारा बनाए गए बर्तनों पर सुंदर
चित्रकारी करती थी। उजबेकिस्तान
स्थित बुखारा का धनी व्यापारी इज्जत
बेग व्यापार के सिलसिले में भारत
आया, सोहनी से मिलने पर वह उसके
सौंदर्य पर आसक्त हो उठा।
सोहनी को देखने के लिए वह रोज सोने
की मुहरें जेब में भरकर कुम्हार के
पास आता और बर्तन खरीदता।
सोहनी भी उसकी तरफ आकर्षित हो गई। वह
सोहनी के पिता के घर में नौकरी करने
लगा, उसका नाम महिवाल पड गया,
क्योंकि वह भैंसें चराने लगा। जब
उनके प्रेम के किस्से आसपास फैले
तो तुला ने सोहनी को बिना बताए
उसकी शादी किसी कुम्हार से कर दी।
महिवाल अपना घर, देश भूलकर फकीर
हो गया। मगर दोनों प्रेमियों ने
मिलना न छोडा। रोज जब रात में
सारी दुनिया सोती, सोहनी नदी के उस
पार महिवाल का इंतजार करती, जो तैरकर
उसके पास आता। महिवाल बीमार हुआ
तो सोहनी एक पक्के घडे की मदद से
तैरकर उससे मिलने पहुंचने लगी।
उसकी ननद ने एक बार उन्हें देख
लिया तो उसनेपक्के घडे की जगह
कच्चा घडा रख दिया। सोहनी घडे
द्वारा नदी पार करने लगी तो डूब गई।
महिवाल उसे बचाने के लिए नदी में
कूदा, वह भी डूब गया। इस तरह यह दुख
भरी प्रेम कहानी खत्म हो गई।
ढोला-मारु
राजपूत प्रेम की गाथा है ढोला-मारु।
पूगल का शासक था पिंगल। उसने
अपनी नन्ही पुत्री मारु का बाल विवाह
नरवार के राजा नल के पुत्र ढोला से कर
दिया। बडे होने पर उसे
विदा किया जाना था। ढोला बडा होने
लगा लेकिन तभी नल की मौत हो गई और
ढोला विवाह की बात भूल गया।
उसका विवाह मलवानी से हो गया। मारु
ने कई बार अपने दूतों को ढोला के पास
संदेश के साथ भेजा, लेकिन हर बार
उसकी पत्नी ने उन्हें बीच ही रोक
दिया। अंत में मारु ने कुछ लोक
गायकों को ढोला के पास भेजा,
जिन्होंने ढोला को विवाह की बात याद
दिलाई। ढोला मारु से मिलने
की चेष्टा करने लगा लेकिन
उसकी ईष्र्यालु पत्नी ने उससे
कहा कि मारु मर चुकी है।
ढोला नहीं रुका, चलता गया। रास्ते में
ही डकैतों के गिरोह से टकराया और
गिरोह के सरदार ने उससे कहा कि मारु
का अन्यत्र विवाह हो चुका है। यह
डकैत भी मारु से एकतरफा प्रेम
करता था। ढोला मारु से मिलने के अपने
निश्चय पर अडिग था। अंतत: वह मारु से
मिलने पहुंच गया। लेकिन
कष्टों का अंत अभी न हुआ था। लौटते
हुए रेगिस्तान के सांप ने मारु को डस
लिया और वह गहन मूर्छावस्था में
चली गई। राजपूत इतिहास में पहली बार
ढोला ने पत्नी की चिता के साथ खुद
सती होना चाहा। इसी बीच एक योगी-
योगिनी ने कहा कि वह मारु को जीवित कर
सकते हैं। उन्होंने मारु को पुन:
जीवनदान दिया। दोनों फिर महल
को लौटने लगे, तभी डकैतों का सरदार
उन्हें मारने आ गया, लेकिन लोक
गायकों ने उन्हें बचा लिया। अंतत: वे
अपने महल लौट सके, अनेक दुखों के बाद
एक सुखांत प्रेम कहानी बन सकी।
शीरीं-फरहाद
फारस की पृष्ठभूमि में जन्मी इस
कहानी का पात्र फरहाद एक शिल्पकार
था, जो राजकुमारी शीरीं से
बेइंतहा मुहब्बत करता था, लेकिन
राजकुमारी इस प्रेम से अनभिज्ञ थी।
निराश फरहाद पहाडों में जाकर रहने
लगा और बांसुरी पर
राजकुमारी की प्रशंसा में धुनें
बजाने लगा। जब यह बात शीरीं को मालूम
हुई तो वह फरहाद से मिली और उसके
प्रेम में गिरफ्त हो गई। शीरीं के
पिता और राजा नहीं चाहते थे
कि उनकी बेटी एक आम आदमी से शादी करे।
आखिर उन्होंने अपनी बेटी के सामने
शर्त रखी कि यदि फरहाद पहाडों के बीच
चट्टानों में नहर खोद दे तो वह
शीरीं का विवाह उससे कर देंगे। यह
बेहद मुश्किल कार्य था, लेकिन फरहाद
ने नहर खोदनी शुरू की। उसकी अथक
मेहनत देखकर
राजा को लगा कि कहीं फरहाद
अपना लक्ष्य प्राप्त न कर ले। नहर
पूरी होने को थी, घबराए हुए राजा ने
अपने दरबारियों से बेटी के विवाह
की खातिर मशविरा करना चाहा। उनके
वजीर ने सलाह
दी कि किसी बूढी स्त्री को फरहाद के
पास भेजें और यह संदेश दें
कि राजकुमारी की मौत हो चुकी है। तब
एक बूढी स्त्री फरहाद के पास
पहुंची और जोर-जोर से रोने लगी।
फरहाद ने उससे रोने का कारण
पूछा तो बुढिया ने कहा, तुम जिसके लिए
अपने शरीर को खटा रहे हो-वह तो मर
चुकी है। यह सुनकर फरहाद
को सदमा पहुंचा और उसने अपने
औजारों से खुद को मार लिया, नहर बन
चुकी थी, मगर पानी की जगह उसमें फरहाद
का लहू बह रहा था। फरहाद की मौत
की खबर सुनकर शीरीं ने भी खुद को खत्म
कर लिया। इस तरह एक और प्रेम
कहानी असमय मौत की गोद में सो गई।
प्रस्तुतकर्ता dil-dosti-pyaar पर